भारत का नेपोलियन किसे कहा जाता है ?

भारत का नेपोलियन किसे कहा जाता है ?

नेपोलियन वह सम्राट जिसने पूरी दुनिया को जीता | जिसने पूरी दुनिया को एक सीमा में बांध कर रख दिया |  लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में नेपोलियन बोनापार्ट से पहले भी कोई सम्राट नेपोलियन रह चुका है | जी हां हम बात कर रहे हैं एक ऐसे व्यक्ति की जिसने पूरी दुनिया पर जीत का परचम लहराया था | नेपोलियन तो सिर्फ एक सेनापति मात्र था | लेकिन भारतीय सम्राट जिसे भारत का नेपोलियन कहा जाता है | इसने अपने पूरे शासनकाल में अपना शासन का परचम पूरी दुनिया में लहराया | इसी वजह से उसे भारत का नेपोलियन नाम दिया गया  |

भारत का नेपोलियन कौन है ?

 भारत का नेपोलियन सम्राट समुद्रगुप्त को कहा जाता है | उन्हें यह नाम इतिहासकार स्मिथ के द्वारा दिया गया था इतिहासकार स्मिथ ने ही भारतीय सम्राट समुद्रगुप्त का अध्यन कर उसकी सम्पूर्ण व्याख्या की है | समुंद्र गुप्त ने अपने शासनकाल के द्वारा गुप्त साम्राज्य की शासन व्यवस्था को भारत के समय पूरी दुनिया में स्थापित कर दिया था | उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत सारे युद्ध लड़े तथा कुछ युद्ध बुद्धिमता के बल पर तथा कुछ युद्ध साहस से लड़कर जीते |

 समुंद्र गुप्त कौन थे ?

 समुंद्र गुप्त भारत के गुप्त वंश राजवंश के तीसरे शासक थे | वे चंद्रगुप्त प्रथम के उत्तराधिकारी थे | चंद्रगुप्त मौर्य के समय से ही गुप्त साम्राज्य को पनपने का मौका मिला था | समुद्रगुप्त के  शासन काल को भारतीय शासन व्यवस्था का स्वर्ण काल भी कहा जाता है | समुद्रगुप्त ने अपने साम्राज्य को पश्चिम में गांधार से लेकर के पूर्व में असम और उत्तर हिमालय से लेकर दक्षिण में सिंहल तक फैला दिया था |

 समुंद्र गुप्त का प्रारंभिक जीवन कैसा था ?

 समुद्रगुप्त का प्रारंभिक जीवन बहुत ही कठिन था | लेकिन अब उन्होंने अपने इन कठिनाइयों को पार करते हुए पूरी दुनिया पर जीत हासिल की | समुद्रगुप्त चंद्रगुप्त प्रथम के पुत्र थे चंद्रगुप्त ने राज्य की राजकुमारी कुमारी देवी से शादी की थी | जिसके कारण उन्हें दहेज में वैशाली साम्राज्य मिला था | वैशाली साम्राज्य गंगा के तट स्थानों से जुड़ी हुई थी उस समय भारत के अर्थव्यवस्था का केंद्र बिंदु गंगा का ही स्थान था | जहां से देश और दुनिया के साथ व्यापार किया जाता था | चंद्रगुप्त की राजधानी पाटलिपुत्र जिसे वर्तमान में हम पटना के नाम से जानते हैं थी | चंद्रगुप्त की मृत्यु के बाद उनके पुत्र समुंद्र गुप्त को अपने पिता के राज्य पर शासन करने का मौका मिला था |

 समुंद्र गुप्त को क्यों कहा जाता है, भारत का नेपोलियन ?

 नेपोलियन बोनापार्ट के बारे में तो हम सभी जानते हैं, जिसने बहुत कम उम्र में ही दुनिया पर जीत हासिल कर ली थी | लेकिन भारत में वह राजा पोरस के द्वारा मैत्री संबंध के कारण हार गया था | बाद में नेपोलियन बोनापार्ट की मृत्यु हो गई | अब हम यहां पर आपको भारतीय नेपोलियन समुद्रगुप्त के बारे में बता रहे हैं कि क्या उन्हें भारत का नेपोलियन कहा जाता था, या उनका यह नाम कैसे पड़ा | इतिहासकार स्मिथ द्वारा समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन नाम दिया गया | क्योंकि जब भारत आए और उन्होंने समुद्रगुप्त के बारे में गहन अध्ययन किया तो उन्होंने पाया कि समुद्रगुप्त के द्वारा फैलाया गया | शासन नेपोलियन बोनापार्ट के शासनकाल में फैले साम्राज्य से कहीं अधिक विस्तृत था |

 समुद्रगुप्त की शासन व्यवस्था और उसके द्वारा जीते गए राज्य |

 यही कारण है कि समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है | समुद्रगुप्त का शासन का इतिहास में विशाल सैन्य अभियान के रूप में भी लिखा गया है | समुद्रगुप्त राजा बनने के बाद ही अपने राज्य को अंदर ही अंदर मिलाने का कार्य पूरा करना शुरू कर दिया था | सबसे पहले उन्होंने मध्य भारत के रोहिलखंड और पद्मावती राज्यों पर हमला किया | इसके बाद बंगाल और नेपाल राज्यों पर भी हमला किया तथा इन सभी राज्यों को अपने राजधानी के साथ जोड़ दिया | इसके बाद उन्होंने असम के राजा के साथ लड़ाई लड़ी और उन्हें हराकर उनसे राज्य शुल्क वसूलने का कार्य भी प्रारंभ कर दिया |

 समुद्रगुप्त ने अपनी विशाल सेना के साथ मलवास योद्धा अर्जुन आया मधुरस और अभी रस राज्य पर भी जीत हासिल की तथा उन्हें भी अपने राज्य में मिला लिया | इसके बाद उसने अफगानिस्तान मध्य एशिया और पूर्वी ईरान के शासकों जैसे शकस और  खुश नाक राज्यों को भी अपने राज्य में मिला लिया | इस प्रकार समुद्रगुप्त विशाल साम्राज्य की स्थापना की | जिसके वजह से इन्हें भारतीय नेपोलियन का नाम दिया गया |

 समुंद्र गुप्त का इतिहास |

 समुंद्र गुप्त 335 ईसा पूर्व से 380 ईसा पूर्व तक गुप्त राजवंश के चौथे राजा और चंद्रगुप्त के बेटे थे | इनके साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी | इन्हें इतिहास का सबसे बड़ा और सफल सम्राट माना जाता है समुद्रगुप्त को गुप्त राजवंश का अंतिम महानतम राजा भी माना जाता है |

 समुद्रगुप्त का कैसा था स्वभाव ?

 समुंद्र गुप्त दुनिया के सबसे सफल शासक थे एक उदार और नरम दिल के शासक थे | इसके अलावा वह एक वीर योद्धा और कला के प्रेमी भी थे उनका नाम जावा पाठ में तंत्रिका कामदा के नाम से जाना जाता है | समुंद्र गुप्त का नाम समुंद्र की चर्चा करते हुए अपने विजय अभियान द्वारा अधिग्रहित शीर्ष पर होने के लिए भी किया जाता है | जिसका अर्थ होता है महासागर |

 समुद्रगुप्त के अन्य भाई भी थे लेकिन उनके पिता ने समुद्रगुप्त के प्रतिभा को देखकर के ही उन्हें उत्तराधिकारी नियुक्त किया था | ऐसा भी माना जाता है कि चंद्रगुप्त की मृत्यु के बाद उनके सभी पुत्रों में एक बहुत बड़ा संघर्ष हुआ जिसमें समुद्रगुप्त की जीत हुई और उन्हें राज्य के शासन की बागडोर प्रदान की गई | समुद्रगुप्त ने शासन पाने के लिए अपने प्रतिद्वंदी छोटे राजकुमारों को हराया था | समुद्रगुप्त का नाम सम्राट अशोक के साथ भी जोड़ा जाता है | हालांकि यह गलत है कि वह एक दूसरे से कहीं ना कहीं संबंधित थे | लेकिन फिर भी वह दोनों अपने अपने विजय अभियान के लिए तथा अपने द्वारा किए गए कार्यों के लिए जाने जाते हैं|

 समुंद्र गुप्त का सिक्का |

 पहले के राजाओं में यह प्रचलन था, कि वह अपने द्वारा अपने किए गए कार्यों के शिलालेख लिखवाते थे | कुछ राजा अपने नाम और अपनी पहचान के सिक्के भी चलाते थे | ऐसा ही कुछ कार्य समुद्रगुप्त के द्वारा भी किया गया | इसमें आठ प्रकार के विभिन्न सिक्के बनवाए जो कि सोने के थे और उन सभी सिक्कों पर उन्होंने अपनी फोटो भी मुद्रित करवाई | इसके बाद उन्होंने इन सिक्को का बाजार में प्रचलन शुरू कर दिया | यहां पर ध्यान देने वाली बात है कि यह आठ प्रकार के सिक्के अलग-अलग कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते थे | कई ऐसे सिक्के भी खुदाई के दौरान मिले हैं | जिन पर समुद्रगुप्त को वीणा बजाते हुए दिखाया गया है कहीं पर समुद्रगुप्त बाघ के साथ लड़ाई कर रहे हैं | जहां पर उन्हें एक कुशल योद्धा के रूप में दर्शाया गया है | कहीं पर सिक्कों पर लड़ाई और कुल्हाड़ी के दृश्य भी अंकित किए गए हैं जो कि बलिदान और समर्पण के साथ जीत के भाव को भी दर्शाता है |

समुद्रगुप्त का धार्मिक स्वभाव

समुद्रगुप्त धार्मिक स्वभाव के थे तथा जाति से ब्राह्मण थे | उन्होंने इलाहाबाद में अपने द्वारा की जाने वाली सेवाओं का शिलालेख करवाया | जिसमें धर्मबंधु की योग्यता के बारे में लिखा गया है | उन्हें सभी धर्मों से प्रेम था | उन्होने बौद्ध विद्वान वासु बंद को संरक्षण दिया और महेंद्र अनुरोध की स्वीकृति प्रदान की |ये सभी कार्य समुन्द्र्गुप्त के बौद्ध धर्म के प्रति उनके लगाव को भी दर्शाता है | इसके बाद समुद्रगुप्त ने बोधगया में एक बौद्ध मठ का भी निर्माण करवाया | समुंद्र गुप्त ने सच्ची भावना से अपने धर्म को आत्मसात किया तथा उन्हें गायों के हजारों के कई सैकड़ों के दाता के रूप में वर्णित भी किया गया है |

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