भारत की सबसे लंबी नदी कौन सी है ?

भारत की सबसे लंबी नदी कौन सी है ?

भारत में नदियों की स्थिति फिलहाल बहुत ही द्यनीय है | इसका मुख्य कारण फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी है | पूजा के नाम पर भी नदियों को सिर्फ और सिर्फ प्रदूषित ही किया जाता है |  गंगा नदी के पनि का इस्तेमाल मुख्यतः  पीने के लिए, साफ-सफाई के लिए, फसलों की सिंचाई के लिए, बिजली बनाने के लिए किया जाता है | आइए हम आपको बताते हैं कि भारत की सबसे लंबी नदी कौन सी है ?

भारतीय नदी जो सबसे लंबी है |

भारत में बहुत सारी छोटी-बड़ी नदियां हैं, जिनका बहुत अधिक महत्व है|  यदि हम दूरी की बात करें तो भारत की गंगा नदी सबसे लंबी नदी है, क्योंकि यह सबसे अधिक दूरी तय करती है | इसके अलावा यदि हम भारत में बहने वाली नदियों के नाम बताएं तो सिंधु और ब्रह्मापुत्र दो ऐसे नदियां हैं | जिनकी कुल लंबाई गंगा नदी की लंबाई से भी अधिक है | लेकिन भारत में इनकी लंबाई गंगा नदी से कम है, इसीलिए भारत में गंगा नदी को सबसे लंबी नदी माना जाता है |

 गंगा नदी

 गंगा को देवनदी भी कहा जाता है | यह हिंदुओं की सबसे पवित्र नदी है | गंगा नदी उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद से निकलती है | गंगा नदी का उत्तराखंड में देवप्रयाग है | इसके अलावा इसे अलकनंदा और भागीरथी नदियों का साथ भी मिलता है | गंगा नदी उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में बहने के बाद बांग्लादेश में प्रवेश करती है, और इसके बाद यह बंगाल की खाड़ी में जाकर हिंद महासागर में मिल जाती है | बांग्लादेश में गंगा नदी को पद्मा नदी के नाम से भी जाना जाता है | गंगा नदी भारत और बांग्लादेश में कुल लंबाई को मिलाकर 2.704 किलोमीटर बहती है |

गंगा नदी का संक्षेप में विवरण

  •  गंगा नदी की कुल लंबाई भारत में 2.525  किलोमीटर है|
  •  गंगा नदी का उद्गम स्थान गंगोत्री हिमनद उत्तराखंड भारत में है |
  •  गंगा नदी की सहायक नदियां दाएं तरफ से महानंदा सोन नदी तथा यमुना है |
  •  गंगा नदी की सहायक नदियों के नाम सरयू करनाली महाकाली कोसी और गंडक है |
  •  गंगा नदी उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल बिहार उत्तराखंड के बाद बांग्लादेश होते हुए बंगाल की खाड़ी से हिंद   महासागर में मिल जाती है |
  • गंगा नदी को 2008 में भारतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया था |
  • प्रयागराज में 16 किलोमीटर गंगा नदी जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग भी घोषित किया गया है |
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गंगा नदी का इतिहास |

गंगा सामाजिक साहित्यिक सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भारत में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है | गंगा नदी का मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है | कई लोग इसे मां और देवी के रूप में भी मानते हैं | भारतीय पुराणों और साहित्य में गंगा के सौंदर्य का बार-बार वर्णन भी किया गया है | तथा इसे आदर के साथ देव गंगा नदी भी कहा जाता है |

 क्या है गंगा के पानी की खासियत |

 गंगा का पानी कभी भी काला नहीं पड़ता है, ना ही इस में कीड़े पड़ते हैं, ना ही यह पानी सड़ता है, और ना ही कभी इस पानी में से बदबू आती है, या नहीं दुनिया भर में गंगा का पानी बहुत ही पवित्र माना जाता है | देश-विदेश से आए बहुत से प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने गंगा नदी के पानी पर कई प्रकार के शोध किए हैं, तथा अभी कई शोध निरंतर चल रहे हैं | वैज्ञानिकों का मानना है कि गंगा नदी के पानी में बैक्टीरियोफेज नाम के विषाणु है ,जो अन्य जीवाणुओं और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं | गंगा की इस अनुपम शुद्धिकरण क्षमता तथा सामाजिक श्रद्धा के बावजूद इसे प्रदूषित होने से नहीं रोका जा सकता है |

गंगा नदी पर अन्य परियोजनाएं |

  गंगा नदी भारत की सबसे लंबी और पवित्र नदियों में से एक है | इसीलिए इसे 2008 में राष्ट्रीय नदी घोषित कर दिया गया था | गंगा नदी पर सरकार के द्वारा समय-समय पर कुछ कार्यक्रम चलाए गए हैं समय के साथ-साथ गंगा नदी प्रदूषित होती जा रही है | और सरकार ने इसे साफ करने के लिए करोड़ों रुपए के बजट का भी प्रावधान किया है | इसके बावजूद गंगा नदी लगातार प्रदूषित बनी हुई है | गंगा नदी पर बहुत सारे बांध और प्रोजेक्ट बनाने के कार्य चल रहे हैं, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी हुई एक महत्वपूर्ण नदी है | गंगा नदी पर फरक्का बांध टिहरी बांध तथा भीमगोड़ा बांध भी बनाए गए हैं |

 फरक्का या बैराज बांध भारत के पश्चिम बंगाल में स्थित गंगा नदी पर बनाया गया है इस पुल का निर्माण कोलकाता बंदरगाह को सेट से मुक्त करने के लिए किया गया था |

 गंगा नदी पर निर्मित दूसरा प्रमुख बांध टिहरी बांध है टिहरी विकास परियोजना | उत्तराखंड में टिहरी जिले में स्थित है यह बांध गंगा नदी के प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथ पर बनाया गया है | टिहरी बांध विश्व का पांचवा और सबसे ऊंचा बांध माना जाता है | इस बांध का निर्माण बिजली उत्पादन सिंचाई और पेयजल के लिए किया गया था | जिससे दिल्ली उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड को पीने का पानी प्राप्त होता है |

 तीसरा और प्रमुख बांध भीमगोड़ा बांध है, जो कि हरिद्वार में स्थित है | इसे अंग्रेजों ने गंगा के पानी को विभाजित करके गंगा नहर को मोड़ने के लिए बनवाया था |  हरिद्वार के भीमगोड़ा स्थान से गंगा नदी की दाहिनी तट की तरफ से निकलती है | शुरू में इस नहर में जलापूर्ति के लिए गंगा नदी में एक स्थाई बांध बनाया गया था लेकिन बारिश होते ही यह बांध टूट जाया करता था, तथा मानसून अवधि के दौरान नहर में पानी चला जाता था इसका नुकसान यह होता था | कि इस नहर के पानी से केवल रवि की फसलों की सिंचाई हो पाती थी | इसीलिए इस स्थाई बांध को तोड़कर के स्थाई बांध भीमगोड़ा बैराज बनवाया गया | इस बांध के बनने के बाद गंगा नदी के पानी द्वारा अब खरीफ की फसलों को भी पानी मिलने लगा है |

गंगा नदी का महत्व |

 गंगा नदी हिंदुओं की सबसे पवित्र नदी है ,तथा हिंदू धर्म में इस नदी के जल को सबसे पवित्र माना जाता है | किसी भी शुभ कार्य में गंगा नदी के पानी का ही इस्तेमाल किया जाता है | वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नदी के पानी में किसी भी प्रकार के कीटाणु नहीं होते हैं | गंगा नदी को जीवनदायिनी नदी भी कहा जाता है | गंगा नदी के किनारे लगभग बहुत बड़ी आबादी रहती है , तथा उत्तर प्रदेश के और मैदानी इलाकों में गंगा नदी के पानी को ही फसलों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है |

गंगा नदी का धार्मिक महत्व |

 भारत में बहुत सारे धार्मिक कथाओं में गंगा नदी का वर्णन मिलता है | भारत पर बहुत सारे पवित्र स्थल भी गंगा नदी के किनारे स्थित है | जिसमें बनारस, हरिद्वार और प्रयागराज शामिल है | ऐसा माना जाता है कि हिंदू धर्म में यदि कोई व्यक्ति गंगा नदी में स्नान करता है, तो उसके सभी पाप धुल जाते हैं | इसके अलावा हिंदू धर्म में मरने के बाद लोग गंगा में अस्थियों तथा रात को भी विसर्जित करते हैं, तथा इसे मोक्ष प्राप्ति का साधन माना जाता है | कुछ लोग अपने जीवन की अंतिम इच्छा गंगा के किनारे जलाए जाने की भी रखते हैं |

  गंगा नदी के किनारे कुछ पर और उत्सव भी मनाए जाते हैं ,जैसे मकर संक्रांति, कुंभ, गंगा दशहरा |

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